मंगलवार, 16 जून 2020

krishna janmashtami । कृष्ण जन्माष्टमी


श्री कृष्ण जी का जन्म मथुरा में हुआ था। श्री कृष्ण को मथुरा के लोग अपना आराध्य देव मानते हैं। श्री कृष्ण जी छोटे होते हुए भी नटखट थे, मखन चोर थे। 
श्री कृष्ण जी गो को वन में चराते थे और उनके साथ ग्वाले भी होते थे। गोपिया उनकी बांसुरी की धुन सुनकर मोहित हो जाती थी। 



श्री कृष्ण जी बहुत ही अच्छे देव माने जाते हैं परंतु फिर भी उनकी शक्ति सीमित है।
गीता जी के अंदर श्री कृष्ण जी अर्जुन को कह रहे हैं कि जो जैसा कर्म करेगा उसको वैसा ही फल मिलेगा।
कहने का मतलब है जिस मनुष्य के पाप है तो पाप ,पुण्य है तो पुण्य, इनको कम ज्यादा नहीं कर सकते।
गीता जी में प्रमाणित किया है कि वह परम अक्षर ब्रह्म जो सबका पिता है उस एक की भक्ति करो।
उसका नाम भी गीता जी में बताया है उसका नाम कबीर देव है।

श्री कृष्ण जी v/s परमात्मा कबीर साहिब।


श्री कृष्ण जी ने अर्जुन के अभिमान को शांत करने के लिए। इंद्र देव के पुत्र मोरध्वज को आरे से चिरवा दिया था। फिर उसको श्री कृष्ण जी ने अपनी शक्ति से जीवित कर दिया था।
जब श्री कृष्ण जी के सगे भांजे की मृत्यु होने पर उसे नहीं जीवित कर पाए। उस समय सारा पांडव रो रहा था। क्योंकि वह मनुष्य की उम्र को नहीं बढ़ा सकते



कबीर परमात्मा जी ने सेखतकी
नाम के मुसलमान फकीर के कहने पर।
दरिया में एक शव बहता जा रहा था उस शव को परमात्मा कबीर साहिब जी ने अपनी शक्ति से जीवित कर दिया था।




परमात्मा कबीर साहिब जी की दूसरी परीक्षा
शेखतकि कि अपनी बेटी को जीवित करने के लिए कबीर साहिब जी को कहा।
कबीर, कबीर साहिब जी ने उस शेख तकी की बेटी को जीवित कर दिया था।



शनिवार, 13 जून 2020

कबीर साहेब

कबीर साहिब जी की अमृतवाणी

कबीर, तीन लोक पिंजरा भया, पाप पुण्य दो जाल। सभी जीव भोजन भये, एक खाने वाला काल।।
गरीब, एक पापी एक पुन्यी आया, एक है सूम दलेल रे।
बिना भजन कोई काम नहीं आवै, सब है जम की जेल रे।।

कबीर साहेब प्रकट



कबीर साहिब जी सन 1398 ईसवी में प्रकट हुआ थे।
सन् 1398 में कबीर साहिब जी काशी के लहरतारा तलाब मैं एक कमल के फूल पर नीरू नीमा को मिले थे।



नीरू ने कबीर साहिब जी को घर ले जाने से मना कर दिया था। परंतु पूर्ण परमात्मा ने उन्हें कहा कि मुझे घर पर ले चलो आपको लोग कुछ भी नहीं कहेंगे।

तब नीरू ने परमात्मा कबीर साहेब जी को अपने कुटिया में लगे थे।



कबीर साहिब जी ने 25 दिन तक दूध नहीं पिया था।
नीमा शिव जी का ध्यान देती थी वह शिव जी को पुकार करती है तो शिवजी एक ऋषि के रूप में नीरू के घर आए। उस ऋषि ने कबीर साहिब जी को अपनी गोद में लिया और उनसे 7 बार वार्ता की। तब कबीर जी ने उस ऋषि को कहा था कि इन्हें कहिए कि वह एक कुंवारी गाय लेकर आए उसका दूध पियूंगा।
कुंवारी गाय लाने के बाद कबीर जी के कहने के उपरांत ऋषि जी ने गाय के पीठ पर हाथ रखा और दूध निकलने लगा।
तब परमात्मा जी ने उस कुमारी गाय का दूध पिया था।


कौन तथा कैसा है कुल का मालिक?



जिन-जिन पुण्यात्माओं ने परमात्मा को प्राप्त किया उन्होंने बताया कि कुल का
मालिक एक है। वह मानव सदृश तेजोमय शरीर युक्त है। जिसके एक रोम कूप
का प्रकाश करोड़ सूर्य तथा करोड़ चन्द्रमाओं की रोशनी से भी अधिक है। उसी
ने नाना रूप बनाए हैं। परमेश्वर का वास्तविक नाम अपनी-अपनी भाषाओं में
कविर्देव (वेदों में संस्कृत भाषा में) तथा हक्का कबीर (श्री गुरु ग्रन्थ साहेब में पृष्ठ
नं. 721 पर क्षेत्राय भाषा में) तथा सत् कबीर (श्री धर्मदास जी की वाणी में क्षेत्राय
भाषा में) तथा बन्दी छोड़ कबीर (सन्त गरीबदास जी के सद्ग्रन्थ में क्षेत्राय भाषा
में) कबीरा, कबीरन् व खबीरा या खबीरन् (श्री कुरान शरीफ़ सूरत फुर्कानि नं. 25,
आयत नं. 19, 21, 52, 58, 59 में क्षेत्राय अरबी भाषा में)। इसी पूर्ण परमात्मा के
उपमात्मक नाम अनामी पुरुष, अगम पुरुष, अलख पुरुष, सतपुरुष, अकाल मूर्ति,
शब्द स्वरूपी राम, पूर्ण ब्रह्म, परम अक्षर ब्रह्म आदि हैं, जैसे देश के प्रधानमंत्रा का
वास्तविक शरीर का नाम कुछ और होता है तथा उपमात्मक नाम प्रधान मंत्रा जी,
प्राइम मिनिस्टर जी अलग होता है। जैसे भारत देश का प्रधानमंत्रा जी अपने पास
गृह विभाग रख लेता है। जब वह उस विभाग के दस्त्तावेजों पर हस्त्ताक्षर करता
है तो वहाँ गृहमंत्रा की भूमिका करता है तथा अपना पद भी गृहमन्त्रा लिखता है,

हस्त्ताक्षर वही होते हैं। इसी प्रकार ईश्वरीय सत्ता को समझना है।





‘‘अवतार की परिभाषा’’


अवतार’ का अर्थ है ऊँचे स्थान से नीचे स्थान पर उतरना। विशेषकर यह
शुभ शब्द उन उत्तम आत्माओं के लिए प्रयोग किया जाता है, जो धरती पर कुछ
अद्धभुत कार्य करते हैं। जिनको परमात्मा की ओर से भेजा हुआ मानते हैं या स्वयं
परमात्मा ही का पृथ्वी पर आगमन मानते हैं।
श्री मद्भगवत गीता अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 तथा 16.17 में तीन पुरूषों
(प्रभुओं) का ज्ञान है।
ु 1ण् क्षर पुरूष जिसे ब्रह्म भी कहते हैं। जिसका ¬ नाम साधना का है। जिसका
प्रमाण गीता अध्याय 8 श्लोक 13 में है।
ु 2ण् अक्षर पुरूष जिसको परब्रह्म भी कहते हैं। जिसकी साधना का मंत्रा तत्
जो सांकेतिक है। प्रमाण गीता अध्याय 17 श्लोक 23 में है।
ु 3ण् उत्तम पुरूष तूः अन्यः = श्रेष्ठ पुरूष परमात्मा तो उपरोक्त दोनों पुरूषों
(क्षर पुरूष तथा अक्षर पुरूष) से अन्य है। वह परम अक्षर पुरूष है जिसे गीता
अध्याय 8 श्लोक 1 के उत्तर में अध्याय 8 के श्लोक 3 में कहा है कि वह परम अक्षर
ब्रह्म है। इसका जाप सत् है जो सांकेतिक है। इसी परमेश्वर की प्राप्ति से साधक
को परम शांति तथा सनातन परमधाम प्राप्त होगा। प्रमाण गीता अध्याय 18 श्लोक
62 में यह परमेश्वर (परम अक्षर ब्रह्म) गीता ज्ञान दाता से भिन्न है। अधिक ज्ञान
प्राप्ति के लिए कृप्या पुस्तक ‘‘धरती पर अवतार’’ सतलोक आश्रम बरवाला से
प्राप्त करें। अवतार दो प्रकार के होते हैं। जैसे ऊपर कहा गया है। अब आप जी
को पता चला कि मुख्य रूप से तीन पुरूष (प्रभु) है। जिनका उल्लेख ऊपर कर
दिया गया है। हमारे लिए मुख्य रूप से दो प्रभुओं की भूमिका रहती है।
1ण् क्षर पुरूष (ब्रह्म) :- जो गीता अध्याय 11 श्लोक 32 में अपने आप को काल
कहता है।
2ण् परम अक्षर पुरूष (परम अक्षर ब्रह्म) :- जिसके विषय में गीता अध्याय 8
श्लोक 3 तथा 8ए9ए10 में तथा गीता अध्याय 18 श्लोक 62 अध्याय 15 श्लोक 1

से 4 तथा 17 में कहा है।







ब्रह्म (काल) के अवतारों की जानकारी



गीता अध्याय 4 का श्लोक 7
यदा, यदा, हि, धर्मस्य, ग्लानिः, भवति, भारत,
अभ्युत्थानम्, अधर्मस्य, तदा, आत्मानम्, सृजामि, अहम्।।7।।
अनुवाद : (भारत) हे भारत! (यदा,यदा) जब-जब (धर्मस्य) धर्मकी (ग्लानिः)
हानि और (अधर्मस्य) अधर्मकी (अभ्युत्थानम्) वृद्धि (भवति) होती है (तदा) तब-तब
(हि) ही (अहम्) मैं (आत्मानम्) अपना अंश अवतार (सृजामि) रचता हूँ अर्थात्
उत्पन्न करता हूँ। (7)

जैसे श्री मद्भगवत् गीता अध्याय 4 श्लोक 7 में गीता ज्ञान दाता ने कहा है

कि जब-जब धर्म में घृणा उत्पन्न होती है। धर्म की हानि होती है तथा अधर्म की
वृद्धि होती है तो मैं (काल = ब्रह्म = क्षर पुरूष) अपने अंश अवतार सृजन करता
हूँ अर्थात् उत्पन्न करता हूँ।
जैसे श्री रामचन्द्र जी तथा श्री कृष्ण चन्द्र जी को काल ब्रह्म ने ही पृथ्वी पर
उत्पन्न किया था। जो स्वयं श्री विष्णु जी ही माने जाते हैं।
इनके अतिरिक्त 8 अवतार और कहे गये हैं। जो श्री विष्णु जी स्वयं नहीं आते
अपितु अपने लोक से अपने कृपा पात्रा पवित्रा आत्मा को भेजते हैं। वे भी अवतार
कहलाते हैं। कहीं-2 पर 25 अवतारों का भी उल्लेख पुराणों में आता है। काल ब्रह्म
(क्षर पुरूष) के भेजे हुए अवतार पृथ्वी पर बढ़े अधर्म का नाश कत्लेआम अर्थात्
संहार करके करते हैं।
उदाहरण के रूप में :- श्री रामचंद्र जी तथा श्री कृष्णचंद्र जी, श्री परशुराम
जी तथा श्री निःकलंक जी (जो अभी आना शेष है, जो कलयुग के अन्त में
आएगा)। ये सर्व अवतार घोर संहार करके ही अधर्म का नाश करते हैं। अधर्मियों
को मारकर शांति स्थापित करने की चेष्टा करते हैं। परन्तु शांन्ति की अपेक्षा
अशांति ही बढ़ती है। जैसे श्री रामचंद्र जी ने रावण को मारने के लिए युद्ध किया।
युद्ध में करोड़ों पुरूष मारे गए। जिन में धर्मी तथा अधर्मी दोनों ही मारे गए। फिर
उनकी पत्नियाँ तथा छोटे-बड़े बच्चे शेष रहे उनका जीवन नरक बन गया।
विधवाओं को अन्य व्यक्तियों ने अपनी हवस का शिकार बनाया। निर्वाह की समस्या
उत्पन्न हुई आदि-2 अनेकों अशांति के कारण खड़े हो गए। यही विधि श्री कृष्ण
जी ने अपनाई थी, यही विधि श्री परशुराम जी ने अपनाई थी। इसी विधि से दशवां
अवतार काल ब्रह्म (क्षर पुरूष) द्वारा उत्पन्न किया जाएगा। उसका नाम ‘‘निःकलंक’’
होगा। वह कलयुग के अन्तिम समय में उत्पन्न होगा। जो राजा हरिशचन्द्र वाली
आत्मा होगी। संभल नगर में श्री विष्णु दत्त शर्मा के घर में जन्म लेगा। उस समय
सर्व मानव अत्याचारी - अन्यायी हो जाऐंगे। उन सर्व को मारेगा। उस समय जिन-2
मनुष्यों में परमात्मा का डर होगा। कुछ सदाचारी होंगे उनको छोड़ जाएगा अन्य
सर्व को मार डालेगा। यह विधि है ब्रह्म (काल-क्षर पुरूष) के अवतारों की अधर्म का

नाश करने तथा शांति स्थापना करने की।


और अधिक जानकारी के लिए रोजाना सुने सत्संग साधना टीवी शाम 7:30 बजे।
ज्ञान गंग जीने की राह पुस्तक जरूर पढ़ें।

सोमवार, 1 जून 2020

कबीरपरमेश्वर_के_चमत्कार

कबीरपरमेश्वर_के_चमत्कार

4दिन_बाद_कबीरप्रकटदिवस




शिशु कबीर परमेश्वर का नामांकन"
जब कबीर साहेब का नाम रखने के लिए कुरान शरीफ पुस्तक को काज़ी ने खोला। प्रथम नाम ‘‘कबीरन्’’ लिखा था। काजियों ने सोचा इस छोटे जाति वाले का कबीर नाम रखना शोभा नहीं देगा। पुनः कुरान शरीफ खोली तो उसमें सर्व अक्षर कबीर-कबीर-कबीर-कबीर हो गए। कबीर परमेश्वर शिशु रूप में बोले मैं कबीर अल्लाह अर्थात् अल्लाहु अकबर, हूँ। मेरा नाम ‘‘कबीर’’ ही रखो।
सकल कुरान कबीर है, हरफ लिखे जो लेख।
काशी के काजी कहै, गई दीन की टेक।।





कबीर जी द्वारा स्वामी रामानन्द के मन की बात बताना’’
स्वामी रामानंद जी विष्णु जी की काल्पनिक मूर्ति बनाकर मानसिक पूजा करते थे। एक समय ठाकुर की मूर्ति पर माला डालनी भूल गए। तब कबीर परमात्मा जो कि 5 वर्ष के बालक की लीला कर रहे थे बोले कि माला की गांठ खोल कर गले में डाल दो स्वामी जी, पूजा खंडित नहीं होगी। तब रामानंद जी जो पर्दे के भीतर मन में पूजा कर रहे थे, कबीर परमात्मा को सबके सामने गले लगा लिया।
मन की पूजा तुम लखी मुकुट माल परवेश।
गरीबदास गति कौ लखै, कौन वरण क्या भेष।।




जगन्नाथ के पांडे की कबीर जी द्वारा रक्षा"
जगन्नाथ पुरी में एक रामसहाय पाण्डा खिचड़ी का प्रसाद उतार रहा था। गर्म खिचड़ी उसके पैर पर गिर गई। उस समय कबीर जी अपने करमण्डल से हिम जल रामसहाय पाण्डा के पैर पर डाला। उसके तुरंत बाद राहत मिलते ही पैर ठीक हो गया। उस समय कबीर जी ना होते रामसहाय पाण्डा का पैर जल जाता।
गरीबदास जी देते हैं -
पग ऊपरि जल डालकर, हो गये खड़े कबीर। गरीबदास पंडा जरया, तहां परया योह नीर।।
जगन्नाथ जगदीश का, जरत बुझाया पंड। गरीबदास हर हर करत, मिट्या कलप सब दंड।।




मृत लड़की को जीवित करना"
शेखतकी ने कबीर साहेब को कहा कि अगर आप अल्लाह हो तो मेरी इस मृत लड़की को जीवित कर दो तब कबीर साहेब ने शेखतकी की मृत लड़की को जीवित कर किया था और उस लड़की का नाम कमाली रख दिया था।




महर्षि सर्वानन्द की माँ शारदा का रोग ठीक करना"
एक सर्वानन्द नाम के महर्षि थे। उसकी आदरणीय माता श्रीमती शारदा देवी पाप कर्म फल से पीडि़त थी। उसने कबीर परमात्मा से उपदेश प्राप्त किया तथा उसी दिन कष्ट मुक्त हो गई।
क्योंकि पवित्र यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 32
में लिखा है कि ‘‘कविरंघारिरसि‘‘ अर्थात् (कविर्) कबीर (अंघारि) पाप का शत्रु (असि) है। फिर इसी पवित्र यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13 में लिखा है कि परमात्मा (एनसः एनसः) अधर्म के अधर्म अर्थात् पापों के भी पाप घोर पाप को भी समाप्त कर देता है।




गोरखनाथ के साथ चमत्कार
एक बार गोरखनाथ जी जब कबीर परमेश्वर जी के साथ ज्ञान गोष्ठी कर रहे थे तो गोरखनाथ जी कबीर जी के सामने 5-6 फुट का त्रिशूल जमीन में गाड़कर उस पर बैठ गये और कहा कि यदि वार्ता करनी है तो मेरे साथ आकर बैठो।
कबीर जी ने एक धागे की रील आसमान में उछाली और 150 फुट की ऊंचाई पर धागे के अंतिम सिरे पर जाकर बैठ गए।
गोरखनाथ जी देखते रह गए।



अधिक जानकारी के लिए रोजाना देखे सत्संग साधना टीवी शाम 7:30 बजे
और पढ़े पुस्तक ' ज्ञान गंगा,'जीने की राह'

Bhai duj 2020

Bhai Dooj 2020 Bhai Dooj, a Hindu festival is celebrated on the second lunar day of Shukla Paksha in the Vikram Samvat Hindu calenda...