श्री कृष्ण जी का जन्म मथुरा में हुआ था। श्री कृष्ण को मथुरा के लोग अपना आराध्य देव मानते हैं। श्री कृष्ण जी छोटे होते हुए भी नटखट थे, मखन चोर थे।
श्री कृष्ण जी गो को वन में चराते थे और उनके साथ ग्वाले भी होते थे। गोपिया उनकी बांसुरी की धुन सुनकर मोहित हो जाती थी।
श्री कृष्ण जी बहुत ही अच्छे देव माने जाते हैं परंतु फिर भी उनकी शक्ति सीमित है।
गीता जी के अंदर श्री कृष्ण जी अर्जुन को कह रहे हैं कि जो जैसा कर्म करेगा उसको वैसा ही फल मिलेगा।
कहने का मतलब है जिस मनुष्य के पाप है तो पाप ,पुण्य है तो पुण्य, इनको कम ज्यादा नहीं कर सकते।
गीता जी में प्रमाणित किया है कि वह परम अक्षर ब्रह्म जो सबका पिता है उस एक की भक्ति करो।
उसका नाम भी गीता जी में बताया है उसका नाम कबीर देव है।
श्री कृष्ण जी v/s परमात्मा कबीर साहिब।
श्री कृष्ण जी ने अर्जुन के अभिमान को शांत करने के लिए। इंद्र देव के पुत्र मोरध्वज को आरे से चिरवा दिया था। फिर उसको श्री कृष्ण जी ने अपनी शक्ति से जीवित कर दिया था।
जब श्री कृष्ण जी के सगे भांजे की मृत्यु होने पर उसे नहीं जीवित कर पाए। उस समय सारा पांडव रो रहा था। क्योंकि वह मनुष्य की उम्र को नहीं बढ़ा सकते।
कबीर परमात्मा जी ने सेखतकी
नाम के मुसलमान फकीर के कहने पर।
दरिया में एक शव बहता जा रहा था उस शव को परमात्मा कबीर साहिब जी ने अपनी शक्ति से जीवित कर दिया था।
परमात्मा कबीर साहिब जी की दूसरी परीक्षा
शेखतकि कि अपनी बेटी को जीवित करने के लिए कबीर साहिब जी को कहा।
कबीर, कबीर साहिब जी ने उस शेख तकी की बेटी को जीवित कर दिया था।





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