भारत देश
भारत देश सोने के चिड़िया कहलाता था। बाद में इसे अंग्रेजों ने लूटा।
भारत देश में शिक्षा 1950 के बाद पनपने लगी थी।
इस शिक्षा ने हमको बहुत गलत रास्ते पर चला दिया है।
शिक्षा ने हमको पैसो के पीछे लगा दिया है।
शिक्षा को परमात्मा ने दिया है। परमात्मा अपनी आत्मा को अपने बारे में बताने के लिए इस शिक्षा को दिया।
हमने इस शिक्षा का फायदा उठाकर इस पैसो के पीछे हम भागने लगे हैं।
परमात्मा ने वेदों और गीतों के माध्यम से उस पूर्ण परमात्मा के बारे में बताने की कोशिश की है। इस शिक्षा के माध्यम से
शिक्षाका पहला चरण
1950 के बाद शिक्षा भारत में धीरे-धीरे उमड़ने लगी थी।
आज 2000 के बाद पूरे भारत में शिक्षा फैल गई थी। हमें चाहिए कि इस शिक्षा का फायदा उठाकर परमात्मा को प्राप्त किया जाए।
शिक्षा का दूसरा चरण
2000 के बाद शिक्षा भारत में पूरी तरह से फैल गई थी।
उसी समय संत रामपाल जी महाराज उसी शिक्षा के माध्यम से पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब जी को सच्चा परमात्मा बता करें हमें इस काल के संसार से छुड़वाने के लिए आते हैं।
वैज्ञानिक मानते हैं कि शिक्षा से मनुष्य जीवन सफल है किंतु ऐसा नहीं है।
परमात्मा ने इस शिक्षा को हमें दिया है। विज्ञानिक भले ही परमात्मा को ना मानते हैं।
किंतु परमात्मा है वेदों में प्रमाण है कि वह पूर्ण ब्रह्म कबीर देव है।
हमें शिक्षा का फायदा उठाकर परमात्मा की भक्ति में लीन होना है।





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